“जाट शब्द हटाने पर विवाद” मेरठ से उठी चिंगारी मुजफ्फरनगर पहुंची

मुजफ्फरनगर: जनपद मेरठ के सकौती गांव में आयोजित महाराजा सूरजमल की प्रतिमा अनावरण कार्यक्रम के दौरान “जाट” शब्द हटाने को लेकर शुरू हुआ विवाद अब मुजफ्फरनगर तक पहुंच गया है। इस मुद्दे ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सियासी और सामाजिक हलचल तेज कर दी है। इसी क्रम में मुजफ्फरनगर में जनपद जाट महासभा की एक अहम बैठक आयोजित की गई, जिसमें इस पूरे प्रकरण पर चर्चा करते हुए आगे की रणनीति तय की गई।
बैठक में जाट महासभा के अध्यक्ष धर्मवीर बालियान ने प्रशासन के इस कदम पर कड़ी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि “जाट” शब्द को हटाना समाज की भावनाओं को आहत करने वाला कदम है, जिसे किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि 10 दिन के भीतर “जाट” शब्द को दोबारा नहीं जोड़ा गया, तो जाट महासभा आंदोलनात्मक कदम उठाने को मजबूर होगी।
धर्मवीर बालियान ने यह भी स्पष्ट किया कि इस मामले में आयोजन समिति जो भी निर्णय लेगी, जाट महासभा उसके साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी रहेगी। उन्होंने कहा कि यह केवल एक शब्द का मामला नहीं है, बल्कि समाज के सम्मान और पहचान से जुड़ा विषय है।
बैठक में मौजूद अन्य पदाधिकारियों और सदस्यों ने भी प्रशासन के इस निर्णय की निंदा की और इसे जल्द से जल्द सुधारने की मांग की। साथ ही यह भी कहा गया कि यदि समय रहते समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
इस पूरे घटनाक्रम के बाद पश्चिमी उत्तर प्रदेश में इस मुद्दे को लेकर माहौल गरमाता नजर आ रहा है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह विवाद आने वाले समय में क्षेत्रीय सियासत को भी प्रभावित कर सकता है।
