“किसके पेट में दर्द है?” सकौती में गरजे डॉ. संजीव बालियान, दिए बड़े सियासी संकेत

मेरठ: सकौती गांव में महाराजा सूरजमल की प्रतिमा अनावरण कार्यक्रम के दौरान पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. संजीव बालियान का भाषण चर्चा का केंद्र बन गया। मंच पर पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान, दिग्विजय चौटाला और हनुमान बेनीवाल की मौजूदगी ने इस कार्यक्रम को महज सांस्कृतिक नहीं, बल्कि सियासी तौर पर बेहद अहम बना दिया।
डॉ. बालियान ने अपने भाषण में कहा, “अलग-अलग विचारधाराओं के नेता एक मंच पर आए हैं, इससे बहुत लोगों के पेट में दर्द है।” उनके इस बयान को सियासी विरोधियों पर परोक्ष हमला माना जा रहा है।
उन्होंने भाषण की शुरुआत ही भावनात्मक अंदाज में करते हुए कहा, “बहुत दिनों से गला घुट रहा था।” इसके जरिए उन्होंने अपने भीतर के दबाव और हालिया राजनीतिक परिस्थितियों की ओर इशारा किया।
कार्यक्रम में बार-बार जाट समाज के इतिहास और महाराजा सूरजमल के पराक्रम का जिक्र हुआ। इसे पश्चिमी यूपी की जातीय राजनीति और सामाजिक एकजुटता से जोड़कर देखा जा रहा है।
सबसे खास बात रही अलग-अलग राज्यों और दलों के नेताओं की एक साथ मौजूदगी। बालियान ने इसे “भाईचारे का समागम” बताया, लेकिन राजनीतिक जानकार इसे पश्चिमी यूपी, हरियाणा, राजस्थान और पंजाब में जाट नेतृत्व के संभावित “सॉफ्ट अलाइनमेंट” के तौर पर देख रहे हैं।
डॉ. बालियान ने पंजाब के सीएम भगवंत मान की खुले मंच से तारीफ करते हुए उन्हें किसानों का सच्चा नेता बताया। इसे किसान राजनीति के जरिए बड़े सियासी संदेश के रूप में भी देखा जा रहा है।
वहीं, उन्होंने प्रशासन पर भी निशाना साधते हुए कार्यक्रम में बाधा डालने और अपमानित करने के आरोप लगाए। इससे उनके और मौजूदा सरकारी तंत्र के बीच तनाव के संकेत भी मिले।
भाषण का सबसे तीखा बयान तब आया जब उन्होंने कहा, “सूद सहित चुकावेंगे।” इस बयान को आने वाले समय में तेज सियासी टकराव के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।
डॉ. बालियान ने ट्रैक्टरों की मौजूदगी का जिक्र करते हुए इसे शक्ति प्रदर्शन और एकजुटता का प्रतीक बताया।
कुल मिलाकर, सकौती का यह कार्यक्रम सिर्फ एक अनावरण समारोह नहीं, बल्कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश—खासकर मुजफ्फरनगर और सरधना की राजनीति में नए समीकरणों की आहट देता नजर आया। 2027 के चुनावी परिदृश्य को देखते हुए यह भाषण काफी अहम माना जा रहा है।
