जातीय संगठनों का उद्देश्य समाज सुधार हो, टकराव नहीं: अशोक बालियान

मेरठ/मुजफ्फरनगर (डिजिटल डेस्क):
पीजेंट वेलफेयर एसोसिएशन के चेयरमेन एवं अखिल भारतीय जाट महासभा के राष्ट्रीय सचिव अशोक बालियान ने कहा है कि जातीय संगठनों का मुख्य उद्देश्य समाज सुधार होना चाहिए, न कि टकराव या वैमनस्य फैलाना। उन्होंने मेरठ के सकौती में महाराजा सूरजमल जी की प्रतिमा स्थापना के दौरान हुए विवाद को चिंताजनक बताते हुए कहा कि ऐसे मामलों को समय रहते नियंत्रित नहीं किया गया तो यह सामाजिक विघटन का कारण बन सकते हैं।
बालियान ने कहा कि भारत जैसे विविध समाज में जातीय संगठन लोगों को जोड़ने और उनके हितों की रक्षा करने में अहम भूमिका निभाते हैं, लेकिन जब इनकी कमान अयोग्य नेतृत्व के हाथों में चली जाती है तो हालात बिगड़ने लगते हैं। ऐसे नेतृत्व में संवाद और समाधान की बजाय हठधर्मिता और टकराव को बढ़ावा मिलता है।
उन्होंने पश्चिमी उत्तर प्रदेश की सामाजिक एकता पर भी चिंता जताई। उनके अनुसार 2013-14 में जो सामाजिक एकजुटता थी, वह 2022 विधानसभा चुनाव के बाद कमजोर पड़ने लगी और 2024 लोकसभा चुनाव में जातीय मतभेदों ने राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित किया।
बालियान ने युवाओं को लेकर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि जब जातीय मंचों से उग्रता को बढ़ावा मिलता है तो युवा पढ़ाई और करियर छोड़कर शक्ति प्रदर्शन और हंगामे को ही उपलब्धि मानने लगते हैं, जिससे उनका भविष्य प्रभावित होता है।
उन्होंने संगठनों से अपील की कि मंच पर केवल उन्हीं लोगों को स्थान दिया जाए जिनका चरित्र और सार्वजनिक जीवन साफ-सुथरा हो। समितियों को आमंत्रित व्यक्तियों की ‘स्क्रीनिंग’ करनी चाहिए ताकि संगठन की गरिमा और विश्वसनीयता बनी रहे।
अंत में उन्होंने कहा कि समाज को भीड़ नहीं, बल्कि गरिमा की आवश्यकता है और यह समय आत्ममंथन व सुधार का है।
