
जयंत परिवार के योगदान का हवाला देकर अतुल प्रधान पर निशाना, सोशल मीडिया पोस्ट से सियासी बहस तेज
सुधीर भारतीय की कलम से ✍🏻
मुजफ्फरनगर। गुर्जर समाज और पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति को लेकर सोशल मीडिया पर चल रही बहस के बीच एक राजनीतिक टिप्पणी ने सियासी माहौल गरमा दिया है। टिप्पणी में राष्ट्रीय लोकदल के अध्यक्ष एवं केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी के परिवार के राजनीतिक योगदान का उल्लेख करते हुए समाज को जातीय नारों के बजाय शिक्षा और सामाजिक उत्थान पर ध्यान देने की अपील की गई है।
पोस्ट में खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड के चेयरमैन डॉ. यशवीर सिंह और कैबिनेट मंत्री वीरेंद्र सिंह का उल्लेख करते हुए दावा किया गया कि उनके प्रयासों से हजारों परिवारों को आत्मनिर्भरता और पशुधन के माध्यम से रोजगार से जोड़ा गया। हालांकि, इन दावों से जुड़े विशिष्ट आंकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि पोस्ट में नहीं की गई है।
पोस्ट में पूर्व उपमुख्यमंत्री चौधरी रामचंद्र विकल और बाबू नारायण सिंह का जिक्र करते हुए कहा गया कि जिस समाज ने उत्तर प्रदेश को दो उपमुख्यमंत्री दिए, वह आज ‘G-4’ जैसे नारों के जरिए अपना सम्मान तलाश रहा है। इसी क्रम में पूर्व सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीश जस्टिस बलबीर सिंह चौहान का भी उल्लेख किया गया है।
टिप्पणी में किसान ट्रस्ट का भी जिक्र करते हुए डॉ. यशवीर सिंह को उसका चेयरमैन बताया गया और समाजवादी पार्टी पर राजनीतिक कटाक्ष किया गया। साथ ही पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव और उनके परिवार से जुड़े राजनीतिक संबंधों का हवाला देते हुए जयंत परिवार के पुराने राजनीतिक सहयोग को रेखांकित करने की कोशिश की गई है।
पोस्ट के अंतिम हिस्से में लेखक ने कहा कि उपरोक्त नेताओं और घटनाओं का संबंध जयंत सिंह परिवार से रहा है। समाज से अपील की गई कि जातीय पहचान के नारों से आगे बढ़कर बच्चों की शिक्षा और खेल पर ध्यान दिया जाए, क्योंकि यही किसानों और समाज के युवाओं के भविष्य को मजबूत कर सकते हैं।
अतुल प्रधान पर सीधा हमला
पोस्ट में सपा विधायक अतुल प्रधान को भी सीधे निशाने पर लिया गया है। लेखक ने कहा कि उनके प्रति व्यक्तिगत रूप से काफी सम्मान रहा, लेकिन मौजूदा विवाद में उनका रुख अपेक्षाओं के विपरीत रहा। पोस्ट में आरोप लगाया गया कि विरोध का स्तर काफी नीचे चला गया है।
लेखक ने वर्ष 2019 और 2022 का संदर्भ देते हुए दावा किया कि 2019 की कथित राजनीतिक गतिविधियों की जानकारी होने के बावजूद 2022 के विधानसभा चुनाव में जयंत परिवार ने कोरोना काल की परिस्थितियों के बीच अतुल प्रधान के पक्ष में प्रचार किया और उन्हें विधायक बनाने के लिए अंतिम समय तक प्रयास किया।
हालांकि, पोस्ट में किए गए इन राजनीतिक दावों और 2019 में कथित गतिविधियों से संबंधित आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं की गई है। इसलिए इन्हें फिलहाल पोस्ट के लेखक के दावे के रूप में ही देखा जा रहा है।
इस बयान के सामने आने के बाद पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति में जातीय पहचान, गुर्जर-जाट राजनीतिक संबंध और जयंत चौधरी परिवार के पुराने राजनीतिक समीकरणों को लेकर बहस तेज होने के आसार हैं।अगर इसे टीवी न्यूज पैकेज के एंकर + वीओ + टिकर + हेडलाइन के फॉर्मेट में चाहिए, तो मैं उसी अंदाज में भी तैयार कर सकता हूं।
