कुंभ मेला–2027 की तैयारियों को लेकर सीएम धामी की बड़ी पहल, 234.55 करोड़ के कार्यों का शिलान्यास

हरिद्वार। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आज हरिद्वार स्थित सीसीआर भवन में कुंभ मेला–2027 की तैयारियों को लेकर एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की। बैठक के बाद मुख्यमंत्री ने कुंभ मेला–2027 से जुड़े 234.55 करोड़ रुपये की लागत वाले कार्यों का शिलान्यास करते हुए शिलापट्टों का अनावरण भी किया।
राज्य सरकार द्वारा स्वीकृत 34 प्रमुख अवसंरचना कार्यों के अंतर्गत ये सभी स्थायी प्रकृति के कार्य हैं, जिनका उद्देश्य कुंभ मेले का सफल, सुरक्षित और सुव्यवस्थित आयोजन सुनिश्चित करने के साथ-साथ हरिद्वार शहर के दीर्घकालीन विकास को मजबूत करना है। शिलान्यास किए गए कार्यों में सेक्टरवार घाट निर्माण एवं सिंचाई अवसंरचना के 7 कार्य शामिल हैं, जिनकी लागत 70.54 करोड़ रुपये है। सड़क एवं परिवहन अवसंरचना के 12 कार्यों पर 127.23 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। वहीं पेयजल एवं जल आपूर्ति अवसंरचना के 9 कार्यों की लागत 18.11 करोड़ रुपये है। इसके अतिरिक्त श्रद्धालु सुविधाओं एवं सहायक अवसंरचना के 6 कार्यों पर 18.67 करोड़ रुपये की लागत आएगी।
इस अवसर पर पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज, वन मंत्री सुबोध उनियाल सहित कई वरिष्ठ अधिकारी और जनप्रतिनिधि मौजूद रहे।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि कुंभ मेला–2027 को लेकर सभी कार्यों की स्पष्ट टाइमलाइन तय कर दी गई है। स्थायी और अस्थायी निर्माण कार्यों, पार्किंग, बिजली, पेयजल, शौचालय, सुरक्षा व्यवस्था और स्नान घाटों से जुड़े सभी विभाग आपसी समन्वय के साथ समय पर कार्य पूरा करें। उन्होंने कहा कि सरकार का प्रयास है कि यह कुंभ मेला ऐतिहासिक, दिव्य और भव्य हो, ताकि देवभूमि उत्तराखंड और मां गंगा की एक सकारात्मक और यादगार छवि श्रद्धालु अपने साथ लेकर जाएं। मुख्यमंत्री ने बताया कि वे स्वयं इन कार्यों की लगातार मॉनिटरिंग कर रहे हैं और कई बैठकें पहले ही हो चुकी हैं। साधु-संतों के मार्गदर्शन और आशीर्वाद से परंपराओं के अनुरूप कुंभ का आयोजन किया जाएगा।
चारधाम यात्रा की तैयारियां अंतिम चरण में
चारधाम यात्रा को लेकर मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि यात्रा की तैयारियां अंतिम चरण में हैं। वर्ष 2025 की यात्रा समाप्त होते ही 2026 की चारधाम यात्रा की तैयारियां शुरू कर दी गई थीं। लगातार स्टेकहोल्डर्स के साथ बैठकें हो रही हैं। इस बार यात्रा अप्रैल में ही शुरू हो रही है और स्कूलों की छुट्टियों के कारण श्रद्धालुओं की संख्या अधिक रहने की संभावना है, इसे ध्यान में रखते हुए सभी व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जा रही हैं ताकि यात्रियों को एक सुखद और सुरक्षित अनुभव मिल सके।
