बागपत : NGT के आदेशों की खुलेआम अवहेलना, यमुना खादर में बेखौफ चल रहा अवैध रेत खनन
बागपत जिले में अवैध रेत खनन का मामला अब सीधे तौर पर प्रशासनिक जवाबदेही और कानून के राज पर सवाल खड़े कर रहा है। National Green Tribunal के स्पष्ट और सख्त आदेशों के बावजूद यमुना खादर क्षेत्र में भारी मशीनों से खुलेआम रेत खनन किया जा रहा है। हालात ऐसे हैं कि न सिर्फ एनजीटी के निर्देशों की अनदेखी हो रही है, बल्कि मुख्यमंत्री के आदेशों की भी खुलेआम धज्जियां उड़ती नजर आ रही हैं।
ताजा मामला बागपत के नैथला गांव के पास यमुना किनारे का है, जहां पॉर्कलेन और जेसीबी मशीनों से दिन-रात रेत निकाली जा रही है। एनजीटी ने नदी तंत्र और पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए भारी मशीनों के इस्तेमाल पर साफ तौर पर रोक लगा रखी है। इसके बावजूद खनन माफिया बेखौफ होकर नियमों को ताक पर रखकर काम कर रहे हैं, जबकि प्रशासन की भूमिका सवालों के घेरे में है।
स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि अवैध खनन की कई बार लिखित और मौखिक शिकायतें की गईं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। ओवरलोड रेत से भरे ट्रक गांव की संकरी सड़कों से गुजर रहे हैं, जिससे हर समय हादसे का खतरा बना हुआ है। यमुना में बनाए गए गहरे कुंड भविष्य में बड़े हादसों और बाढ़ जैसी स्थिति को न्योता दे सकते हैं।
इस पूरे मामले में सोशल मीडिया पर दो वीडियो भी वायरल हो चुके हैं, जिनमें साफ तौर पर भारी मशीनों से खनन और ट्रकों में रेत लादते हुए दृश्य दिखाई दे रहे हैं। आरोप है कि कुछ जिम्मेदार अधिकारियों की मिलीभगत के चलते खनन माफियाओं के हौसले बुलंद हैं। अवैध रेत खनन से जहां पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंच रहा है, वहीं आसपास के गांवों में कटान और बाढ़ का खतरा भी तेजी से बढ़ रहा है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या संबंधित अधिकारी एनजीटी के आदेशों से अनजान हैं या फिर जानबूझकर आंखें मूंदे हुए हैं। यदि न्यायिक आदेशों की इसी तरह अवहेलना होती रही, तो यह कानून व्यवस्था पर सीधा प्रहार माना जाएगा। अब क्षेत्र में मांग उठ रही है कि पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए, दोषी खनन माफियाओं और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ सख्त विभागीय व कानूनी कार्रवाई की जाए।
