मेरठ के शहीद इंस्पेक्टर सुनील कुमार को मरणोपरांत कीर्ति चक्र, यूपी STF के पहले जांबाज को मिला देश का बड़ा वीरता सम्मान

मेरठ। उत्तर प्रदेश पुलिस के इतिहास में 15 अगस्त 2026 का दिन एक खास अध्याय के रूप में दर्ज हो गया। मेरठ के इंचौली थाना क्षेत्र के मसूरी गांव निवासी और यूपी STF के जांबाज इंस्पेक्टर सुनील कुमार को मरणोपरांत कीर्ति चक्र से सम्मानित किया गया है। यह शांतिकाल में दिया जाने वाला देश का दूसरा सर्वोच्च वीरता पुरस्कार है। सुनील कुमार यूपी STF के पहले ऐसे कर्मी हैं, जिन्हें यह सम्मान मिला है।
सुनील कुमार ने करीब साढ़े तीन दशक तक पुलिस विभाग में सेवा की। वर्ष 1990 में कांस्टेबल के रूप में पुलिस सेवा में भर्ती हुए सुनील कुमार ने अपनी मेहनत, अनुशासन और अदम्य साहस के बल पर इंस्पेक्टर के पद तक का सफर तय किया। लंबे समय तक पीएसी में सेवा देने के बाद वह स्पेशल टास्क फोर्स से जुड़े और करीब 16 वर्षों तक STF में रहे।
कांस्टेबल से STF के जांबाज इंस्पेक्टर तक
STF में रहते हुए सुनील कुमार ने कई कुख्यात अपराधियों के खिलाफ चलाए गए अभियानों में हिस्सा लिया। मुश्किल ऑपरेशन के दौरान आगे रहकर मोर्चा संभालना उनकी पहचान बन गई थी। पुलिस सेवा के दौरान उन्हें कई पुरस्कार और सम्मान भी मिले। परिवार के मुताबिक सुनील कुमार की इच्छा थी कि उनकी बहादुरी के लिए उन्हें वीरता पुरस्कार मिले। शहादत के बाद उनकी यह इच्छा भी पूरी हुई।
20 जनवरी 2025 की वह रात
सुनील कुमार की जिंदगी का सबसे अहम अध्याय 20 जनवरी 2025 की रात लिखा गया। शामली के झिंझाना क्षेत्र में STF की टीम को कुख्यात कग्गा गैंग के बदमाशों की मौजूदगी की सूचना मिली थी। टीम ने बदमाशों की घेराबंदी की, जिसके बाद पुलिस और बदमाशों के बीच मुठभेड़ शुरू हो गई।
गोलीबारी के बीच इंस्पेक्टर सुनील कुमार ने टीम का नेतृत्व करते हुए मोर्चा संभाला। मुठभेड़ में चार बदमाश मारे गए। इसी दौरान सुनील कुमार को भी गोलियां लगीं। रिपोर्टों के मुताबिक उनके पेट में तीन गोलियां लगी थीं। गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं छोड़ी और ऑपरेशन में डटे रहे।
अस्पताल में जिंदगी और मौत की जंग
मुठभेड़ में गंभीर रूप से घायल होने के बाद सुनील कुमार को उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया। बाद में उन्हें गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया गया। डॉक्टरों ने उन्हें बचाने की पूरी कोशिश की, लेकिन हालत लगातार गंभीर बनी रही।
22 जनवरी 2025 को इंस्पेक्टर सुनील कुमार ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। उनकी शहादत की खबर से मेरठ समेत पूरे उत्तर प्रदेश में शोक की लहर दौड़ गई।
राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई
23 जनवरी 2025 को शहीद सुनील कुमार का पार्थिव शरीर मेरठ लाया गया। पुलिस लाइन में अधिकारियों और पुलिसकर्मियों ने उन्हें अंतिम सलामी दी। इसके बाद पार्थिव शरीर उनके पैतृक गांव मसूरी ले जाया गया, जहां राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया।
अंतिम विदाई के दौरान परिवार का दर्द हर किसी की आंखें नम कर रहा था। उनके बेटे मनजीत की आंखों से आंसू थम नहीं रहे थे। एक परिवार ने अपना बेटा और पिता खोया, लेकिन देश की सुरक्षा के लिए दिए गए इस सर्वोच्च बलिदान ने सुनील कुमार को हमेशा के लिए अमर कर दिया।
शहादत के डेढ़ साल बाद मिला बड़ा सम्मान
करीब डेढ़ साल बाद 15 अगस्त 2026 को सुनील कुमार के परिवार के लिए एक बार फिर भावुक और गौरवपूर्ण दिन आया। देश ने उनकी बहादुरी को मरणोपरांत कीर्ति चक्र देकर सलाम किया।
उनकी पत्नी मुनेश देवी वीरता पदक ग्रहण करेंगी। परिवार के लिए यह सम्मान एक ओर सुनील कुमार की शहादत की यादों को ताजा करता है, तो दूसरी ओर उनके साहस और कर्तव्यनिष्ठा पर गर्व करने का अवसर भी देता है।
बेटे ने भी चुना पिता का रास्ता
शहीद इंस्पेक्टर सुनील कुमार के बेटे मनजीत भी अपने पिता के नक्शेकदम पर चलना चाहते हैं। वह यूपी पुलिस में भर्ती होकर अपने पिता की तरह ईमानदारी और लगन से देश और प्रदेश की सेवा करना चाहते हैं।
सुनील कुमार की कहानी सिर्फ एक पुलिस अधिकारी की शहादत की कहानी नहीं है। यह उस वर्दी की कहानी है, जो खतरे के सामने डटकर खड़ी रहती है। यह उस परिवार की कहानी है, जिसने अपने प्रियजन को खोकर भी देश की सेवा पर गर्व किया।
मेरठ के मसूरी गांव से कांस्टेबल के रूप में शुरू हुआ सफर STF के इंस्पेक्टर तक पहुंचा और 20 जनवरी 2025 को देश की सुरक्षा के लिए दिए गए सर्वोच्च बलिदान के बाद 15 अगस्त 2026 को कीर्ति चक्र तक पहुंच गया।
शहीद इंस्पेक्टर सुनील कुमार को देश का सलाम।
