मुजफ्फरनगर में नसीरपुर विवाद गहराया: 14 मार्च को दो-दो महापंचायत के ऐलान से बढ़ा तनाव

मुजफ्फरनगर। जनपद के थाना तितावी क्षेत्र के गांव नसीरपुर में एक मामूली विवाद अब बड़े सामाजिक टकराव का रूप लेता नजर आ रहा है। गाड़ी और भैंसा-बुग्गी हटाने को लेकर शुरू हुई कहासुनी अब दो समुदायों के बीच प्रतिष्ठा की लड़ाई बन गई है। एक ओर किसान मजदूर संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष ठाकुर पूरन सिंह ने 14 मार्च को ‘सम्मान बचाओ महापंचायत’ का ऐलान किया है, वहीं कश्यप समाज ने भी उसी दिन, उसी गांव में अपनी महापंचायत बुलाने की घोषणा कर दी है। इससे पुलिस और प्रशासन की चिंता बढ़ गई है।
क्या है पूरा मामला
बताया जा रहा है कि 6 मार्च को नसीरपुर गांव में ठाकुर पूरन सिंह और कश्यप समाज के युवक दुष्यंत के बीच गाड़ी और भैंसा-बुग्गी हटाने को लेकर कहासुनी हो गई थी। आरोप है कि इस दौरान ठाकुर पूरन सिंह के बेटों और भाई ने दुष्यंत के साथ मारपीट कर दी, जिसमें वह घायल हो गया। पुलिस ने पीड़ित की तहरीर के आधार पर मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई करते हुए ठाकुर पूरन सिंह के बेटों और भाई को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया।
कश्यप समाज का सख्त रुख
वहीं इस घटना के बाद कश्यप समाज में नाराजगी देखी जा रही है। गांव अलीपुर खुर्द (तिरपड़ी) में आयोजित पंचायत में समाज के लोगों ने इसे सम्मान का मुद्दा बताया। पंचायत में मांग की गई कि ठाकुर पूरन सिंह सार्वजनिक रूप से माफी मांगें। समाज के नेताओं ने साफ कहा कि यदि 14 मार्च को ठाकुर पूरन सिंह नसीरपुर में पंचायत करेंगे तो उसी दिन कश्यप समाज भी बड़ी संख्या में जुटकर अपनी महापंचायत करेगा। इस दौरान खाप चौधरी ओमप्रकाश कश्यप, इंजीनियर देवेंद्र कश्यप, ग्राम प्रधान नीरज कश्यप और भाजपा मंडल उपाध्यक्ष सागर कश्यप सहित कई लोग मौजूद रहे।
ठाकुर पूरन सिंह के तेवर बरकरार
दूसरी ओर किसान नेता ठाकुर पूरन सिंह ने माफी मांगने से साफ इनकार कर दिया है। उन्होंने कहा कि अपने बेटों को जेल भेजकर उन्होंने उसी दिन समझौता कर लिया था, इसलिए अब माफी मांगने का सवाल नहीं उठता। उनका आरोप है कि उनकी लड़ाई किसी समाज से नहीं बल्कि पुलिस प्रशासन की एकतरफा कार्रवाई से है। उनका कहना है कि बिना निष्पक्ष जांच के गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है।
प्रशासन के सामने चुनौती
एक ही दिन और एक ही गांव में दो महापंचायत के ऐलान ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। खुफिया विभाग को अलर्ट कर दिया गया है और तितावी क्षेत्र में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया जा रहा है। प्रशासन की कोशिश है कि दोनों पक्षों से बातचीत कर मामले को शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाया जाए।
अब पूरे जिले की नजर 14 मार्च पर टिकी है। देखना होगा कि प्रशासन इस टकराव को टालने में कितना सफल होता है या नसीरपुर में सामाजिक और सियासी तनाव और बढ़ता है।
