यूपी में पंचायत चुनाव को लेकर बढ़ी ग्राम प्रधानों की टेंशन, बैठक कर लिया बड़ा फैसला

उत्तर प्रदेश में प्रस्तावित त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव को लेकर ग्राम प्रधानों की चिंता बढ़ती नजर आ रही है। चुनाव की संभावित तारीखों और तैयारियों को लेकर मिल रहे संकेतों के बीच कई ग्राम प्रधानों ने बैठक कर अपनी रणनीति तय की है।
बताया जा रहा है कि प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव वर्ष 2026 में होने हैं और सामान्य रूप से यह चुनाव जून के आसपास कराए जाते हैं। हालांकि, अभी तक सरकार की ओर से चुनाव को लेकर तेज तैयारी नजर नहीं आ रही है। इसके पीछे कई कारण बताए जा रहे हैं, जिनमें आरक्षण तय करने के लिए अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) समिति का गठन भी एक प्रमुख कारण माना जा रहा है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि वर्ष 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव को देखते हुए सरकार पंचायत चुनाव कराने को लेकर सावधानी बरत सकती है। सूत्रों के मुताबिक यदि विधानसभा चुनाव से पहले पंचायत चुनाव होते हैं तो इसका सीधा असर विधानसभा चुनाव पर भी पड़ सकता है।
इसी अनिश्चितता के चलते ग्राम प्रधानों ने बैठक कर बड़ा निर्णय लिया है। प्रधानों का कहना है कि यदि किसी कारणवश पंचायत चुनाव समय पर नहीं होते हैं और उन्हें 2027 के बाद कराया जाता है, तो ऐसे में वर्तमान ग्राम प्रधानों का कार्यकाल बढ़ाया जाना चाहिए।
ग्राम प्रधानों का यह भी कहना है कि यदि पंचायतों में प्रशासक नियुक्त किए जाते हैं तो इससे भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिल सकता है। उनका आरोप है कि वर्ष 2021 के पंचायत चुनाव के दौरान भी कई ग्राम पंचायतों के खातों से बड़ी मात्रा में धनराशि निकाली गई थी, जिसका पूरा हिसाब आज तक स्पष्ट नहीं हो पाया है।
प्रधानों ने चेतावनी दी कि यदि सरकार उनकी मांगों पर ध्यान नहीं देती तो पहले मुख्यमंत्री और राज्यपाल के नाम ज्ञापन दिया जाएगा। इसके बाद भी समाधान न होने पर ग्राम प्रधान हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटा सकते हैं।
इस संबंध में ग्राम पंचायत लछेड़ा के प्रधान पति कुलदीप कुमार, दूधाहेड़ी के ग्राम प्रधान अशोक कुमार और गोयला के ग्राम प्रधान धर्मपाल सिंह ने भी पंचायत चुनाव को लेकर अपनी चिंताएं और मांगें सामने रखीं।
