- गैर हिंदुओं मंदिर में निषेध
डिजिटल डेस्क | हरिद्वार
हर की पौड़ी पर अहिंदुओं के प्रवेश को लेकर चल रही बहस और चारों धामों में गैर हिंदुओं के प्रवेश पर रोक की मांग के बीच अब मंदिरों और देवस्थानों में मर्यादित परिधान और मर्यादित आचरण को लेकर एक बार फिर आवाज उठी है। इस मुद्दे पर दक्षेश्वर प्रजापति महादेव मंदिर के प्रबंधक और महानिर्वाणी अखाड़े के श्रीमहंत स्वामी रविंद्र पुरी
ने स्पष्ट अपील की है कि देवस्थानों को मनोरंजन स्थल नहीं बल्कि आत्मरंजन और साधना का केंद्र माना जाना चाहिए।
स्वामी रविंद्र पुरी ने कहा कि मंदिरों में आने वाले श्रद्धालुओं की वेशभूषा, आचरण, व्यवहार और भावना पवित्र होनी चाहिए। तभी देवदर्शन का वास्तविक फल प्राप्त होता है। उन्होंने कहा कि आज कई बार देखने में आता है कि युवा पीढ़ी, महिलाएं और पुरुष अनजाने में ऐसे व्यवहार कर बैठते हैं, जिससे वे स्वयं निंदा का पात्र बन जाते हैं और धार्मिक वातावरण भी प्रभावित होता है।
उन्होंने सभी हिंदू भाई-बहनों से अपील करते हुए कहा कि अपने बच्चों में संस्कार पैदा करें और उन्हें यह सिखाएं कि मंदिर में कैसे आचरण किया जाता है। भारत के किसी भी कोने में, किसी भी देवता के मंदिर या धार्मिक स्थल पर जाएं, तो वहां की परंपरा, मर्यादा और भावनाओं का सम्मान करना आवश्यक है।
श्रीमहंत रविंद्र पुरी ने मंदिर संचालकों, संतों द्वारा संचालित आश्रमों और मंदिरों तथा सरकार के मंदिर बोर्डों से भी आग्रह किया कि वे इन बातों पर गंभीरता से ध्यान दें। उन्होंने कहा कि यदि लोकाचार और व्यवहार में मर्यादा नहीं रहेगी, तो धर्म भी नहीं बचेगा। धर्म का अर्थ ही धारण करना है और धर्म तभी टिकता है जब समाज मर्यादा में रहता है।
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे सूर्य का धर्म सभी को समान रूप से प्रकाश देना है, वैसे ही देवस्थानों की व्यवस्था भी पवित्र और सुव्यवस्थित होनी चाहिए। श्रद्धालुओं के किसी भी कर्म से मंदिर का वातावरण दूषित न हो, इसका विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए। खासतौर पर मंदिर परिसरों में नशीले पदार्थों का सेवन पूरी तरह प्रतिबंधित होना चाहिए।
स्वामी रविंद्र पुरी ने शासन और राज्य सरकारों से भी अपील की कि जहां अत्यधिक भीड़-भाड़ रहती है, वहां प्रशासन को सख्त और समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करनी चाहिए। उन्होंने बताया कि दक्षेश्वर प्रजापति महादेव मंदिर में इस संबंध में पहले से ही सूचना बोर्ड लगाए गए हैं, ताकि श्रद्धालु नियमों और मर्यादाओं का पालन कर सकें।
