विकास प्राधिकरण मुज़फ्फरनगर के ऑफिस में बीजेपी नेता ने भ्रस्टाचार का आरोप लगा जमकर लगये इंकलाब के नारे
डिजिटल डेस्क | मुजफ्फरनगर
मुजफ्फरनगर विकास प्राधिकरण (एमडीए) कार्यालय में बुधवार दोपहर उस समय हंगामे की स्थिति बन गई, जब भारतीय जनता पार्टी के युवा नेता विपुल त्यागी ने एक जूनियर इंजीनियर पर रिश्वत मांगने और अभद्र व्यवहार के गंभीर आरोप लगाते हुए कार्यालय परिसर में धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया। अचानक हुए इस प्रदर्शन से कार्यालय में कामकाज प्रभावित हुआ और कुछ समय के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
भाजपा नेता विपुल त्यागी ने आरोप लगाया कि शहर कोतवाली क्षेत्र के गांव मालिर निवासी विश्वास त्यागी ने अपने गांव में तीन दुकानों का निर्माण कराया है। इस निर्माण कार्य को लेकर मुजफ्फरनगर विकास प्राधिकरण के जूनियर इंजीनियर राजीव कोहली द्वारा पहले ही एक लाख रुपये की रिश्वत ली जा चुकी है। आरोप है कि इसके बावजूद अब जेई द्वारा तीन लाख रुपये अतिरिक्त रिश्वत की मांग की जा रही है। विपुल त्यागी का कहना है कि जब वह इस मामले में स्पष्टीकरण लेने जेई के पास पहुंचे, तो उनके साथ अभद्र व्यवहार किया गया।
विपुल त्यागी ने यह भी आरोप लगाया कि बातचीत के दौरान जूनियर इंजीनियर द्वारा मुख्यमंत्री के बारे में आपत्तिजनक टिप्पणी की गई और उन्हें धमकी दी गई। इस घटना से आक्रोशित होकर विपुल त्यागी अपने समर्थकों के साथ एमडीए कार्यालय में ही धरने पर बैठ गए। इस दौरान जमकर नारेबाजी की गई और भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की गई।

धरना दे रहे भाजपा नेता ने कहा कि भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाना उनका लोकतांत्रिक अधिकार है और जब तक संबंधित अधिकारी के खिलाफ ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक उनका धरना जारी रहेगा। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और दोषी पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई की जाए।
प्रदर्शन के दौरान निर्माणकर्ता विश्वास त्यागी भी मौके पर मौजूद रहे। उन्होंने भी जूनियर इंजीनियर पर रिश्वत मांगने के आरोप दोहराए और कहा कि अवैध मांग पूरी न करने पर उन्हें कार्रवाई की धमकी दी जा रही है। विश्वास त्यागी ने मामले में न्याय की गुहार लगाई।
वहीं, पूरे प्रकरण पर मुजफ्फरनगर विकास प्राधिकरण के जूनियर इंजीनियर राजीव कोहली ने सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उन्होंने कहा कि उनके ऊपर लगाए गए आरोप पूरी तरह झूठे, निराधार और बेबुनियाद हैं। जेई का कहना है कि उन्हें जानबूझकर बदनाम करने की कोशिश की जा रही है।
फिलहाल इस मामले ने तूल पकड़ लिया है और प्रशासन की भूमिका पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं कि वह इस विवाद को लेकर आगे क्या कार्रवाई करता है।
